अब निशा नभ से उतरती!

आज एक बार फिर से मैं देश में गीत विधा के शिखर पुरुष स्वर्गीय हरिवंशराय बच्चन जी का एक गीत शेयर कर रहा हूँ, जो निशा के अवतरण के संबंध में है|

बच्चन जी की बहुत सी रचनाएं मैंने पहले भी शेयर की हैं|

लीजिए आज प्रस्तुत है स्वर्गीय हरिवंशराय बच्चन जी का यह गीत –

अब निशा नभ से उतरती!

देख, है गति मन्द कितनी
पास यद्यपि दीप्ति इतनी,
क्या सबों को जो ड़राती वह किसी से आप ड़रती?
जब निशा नभ से उतरती!

थी किरण अगणित बिछी जब,
पथ न सूझा! गति कहाँ अब?-
कुछ दिखाता दीप अंबर, कुछ दिखाती दीप धरती!
अब निशा नभ से उतरती!

था उजाला जब गगन में
था अँधेरा ही नयन में,
रात आती है हृदय में भी तिमिर अवसाद भरती।
अब निशा नभ से उतरती!

 (आभार- एक बात मैं और बताना चाहूँगा कि अपनी ब्लॉग पोस्ट्स में मैं जो कविताएं, ग़ज़लें, शेर आदि शेयर करता हूँ उनको मैं सामान्यतः ऑनलाइन उपलब्ध ‘कविता कोश’ अथवा ‘Rekhta’ से लेता हूँ|)

आज के लिए इतना ही,

नमस्कार|                                         

                               ********  

4 responses to “अब निशा नभ से उतरती!”

  1. christinenovalarue avatar
    christinenovalarue

    💙

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  2. नमस्कार 🙏

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