ज़िक्र है कई साल का

सुनो ज़िक्र है कई साल का कि किया इक आपने वा‘दा था,

सो निबाहने का तो ज़िक्र क्या तुम्हें याद हो कि न याद हो|

मोमिन ख़ाँ मोमिन

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