A sky full of cotton beads like clouds
जनाब-ए-‘कैफ़’ ये दिल्ली है ‘मीर’ ओ ‘ग़ालिब’ की,
यहाँ किसी की तरफ़-दारियाँ नहीं चलतीं|
कैफ़ भोपाली
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