गोवा में रहते हुए 6-7 साल हो गए, बहुत सी ‘बीच’ यहाँ की एक-एक करके देख ली हैं, लेकिन अभी भी बहुत सी ऐसी होंगी जिनको नहीं देखा होगा| शायद बहुत लंबे समय तक यहाँ रहने के बाद भी दावा करना मुश्किल हो किसी के लिए कि उसने सभी बीच देख ली हैं| चारों तरफ समुद्र से घिरे गोवा के लिए बीच भी तो मुहल्लों की तरह हैं और शायद मोहल्लों की तरह बहुत सी बार बीच भी नई बन जाती हैं|

हम यहाँ रहते हैं पणजी में मीरामार बीच के पास जबकि घर के सामने की बीच ‘करेंजले बीच’ कहलाती है| पणजी क्योंकि नगर क्षेत्र है, गोवा की राजधानी है इसलिए यहाँ ‘ऑफिशियल’ काम से आने वाले लोग ज्यादा होते हैं, होटल भी ज्यादा महंगे हैं यहाँ पर, जबकि शुद्ध रूप से टूरिस्ट लोग नगर से दूर पड़ने वाले बीच पर ज्यादा जाते हैं, जबकि मीरामार बीच को पिछले दिनों काफी सजाया भी गया है|

हाँ तो इस बार हम सपरिवार पिछले शनिवार को 3 दिन के लिए मोर्जिम बीच पर गए| वैसे तो प्रकृति के विभिन्न स्वरूपों की तुलना करना उचित नहीं है, परंतु मुझे मीरामार और मोर्जिम बीच में काफी समानता लगीं, लेकिन एक बात जो इनको विशेष रूप से अलग करती है, वो यह कि यह शहर से काफी दूर है और यह विदेशियों को, यूरोपीय लोगों को काफी प्रिय है| हमें बताया गया कि एक महीने बाद यहाँ यूरोपीय लोगों की भरमार हो जाएगी, वे अपनी मार्केट भी बना लेते हैं और 2-3 महीने का समय यहाँ आनंद से बिताते हैं|

कुल मिलाकर यह एक साफ-सुथरी और कम भीड़-भाड़ वाली बीच है| और हाँ नई जगह गए तो वहाँ के होटलों और रेस्टोरेंट्स का अनुभव तो होना ही था| यहाँ हम 3 दिन तक ‘जस्टा’ होटल में रुके, अच्छी व्यवस्था थी वहाँ पर रहने और खाने की और सबसे बड़ी आवश्यकता जो हमारी पोती की थी, वह वहाँ के स्वीमिंग पल ने पूरी कर दी| तीन दिन तक इस होटल की मेजबानी का आनंद लेने के साथ ही हमने इस क्षेत्र के होटलों में भोजन का आनंद भी लिया, जिनमें यहाँ पर स्थित ‘टोमेटोज़’ होटल में भोजन करना, हमने दूसरे प्रसिद्ध टोमेटोज़ में पहले भोजन किया है, यह अलग अनुभव था| इसके अलावा दो होटल और थे जहां कुछ अलग क्षेत्रों के विशेष जायके, जैसे एक ही भोजन के बिहारी और करनाटकी वेरीएन्ट, कुचन्स (Kuchan’s) होटल में, इसके अलावा आर्टजुना (Artjuna) होटल में ब्रेड्स, कॉफी आदि की विभिन्न वेरायटी भी अपने आप में एक अलग अनुभव था|

कुल मिलाकर अपने ही गोवा के एक और पक्ष देखने का यह श्रेष्ठ अनुभव था|

आज के लिए इतना ही,
(आभार- एक बात मैं और बताना चाहूँगा कि अपनी ब्लॉग पोस्ट्स में मैं जो कविताएं, ग़ज़लें, शेर आदि शेयर करता हूँ उनको मैं सामान्यतः ऑनलाइन उपलब्ध ‘कविता कोश’ अथवा ‘Rekhta’ से लेता हूँ|)
आज के लिए इतना ही,
नमस्कार|
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