न हम होंगे न तुम होगे न दिल होगा मगर फिर भी,
हज़ारों मंज़िलें होंगी हज़ारों कारवाँ होंगे|
मजरूह सुल्तानपुरी
A sky full of cotton beads like clouds
न हम होंगे न तुम होगे न दिल होगा मगर फिर भी,
हज़ारों मंज़िलें होंगी हज़ारों कारवाँ होंगे|
मजरूह सुल्तानपुरी
Leave a comment