हज़ारों कारवाँ होंगे!

न हम होंगे न तुम होगे न दिल होगा मगर फिर भी,

हज़ारों मंज़िलें होंगी हज़ारों कारवाँ होंगे|

मजरूह सुल्तानपुरी

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