माज़ी की रुस्वाई भी!

यादों की बौछारों से जब पलकें भीगने लगती हैं,

सोंधी सोंधी लगती है तब माज़ी की रुस्वाई भी|

गुलज़ार

4 responses to “माज़ी की रुस्वाई भी!”

  1. बहुत सुंदर।

    Liked by 1 person

    1. हार्दिक धन्यवाद जी

      Like

Leave a comment