हम जंगल के जोगी!

हम जंगल के जोगी हम को एक जगह आराम कहाँ,

आज यहाँ कल और नगर में सुब्ह कहाँ और शाम कहाँ|

इब्न-ए-इंशा

One response to “हम जंगल के जोगी!”

  1. Beautiful lines👍👍👍

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