आज तो जानी रस्ता तकते शाम का चाँद पदीद हुआ*,
तूने तो इंकार किया था दिल कब ना-उम्मीद हुआ|
*उदित हो गया
इब्न-ए-इंशा
A sky full of cotton beads like clouds
आज तो जानी रस्ता तकते शाम का चाँद पदीद हुआ*,
तूने तो इंकार किया था दिल कब ना-उम्मीद हुआ|
*उदित हो गया
इब्न-ए-इंशा
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