शाम हुई फिर जोश-ए-क़दह* ने बज़्म-ए-हरीफ़ाँ**रौशन की,
घर को आग लगाएँ हम भी रौशन अपनी रात करें|
*शराब पीने का जोश, **जीवन की महफ़िल
फ़ैज़ अहमद फ़ैज़
A sky full of cotton beads like clouds
शाम हुई फिर जोश-ए-क़दह* ने बज़्म-ए-हरीफ़ाँ**रौशन की,
घर को आग लगाएँ हम भी रौशन अपनी रात करें|
*शराब पीने का जोश, **जीवन की महफ़िल
फ़ैज़ अहमद फ़ैज़
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