वफ़ा के बग़ैर भी!

बरसों से इस मकान में रहते हैं चंद लोग,

इक दूसरे के साथ वफ़ा के बग़ैर भी|

मुनव्वर राना

2 responses to “वफ़ा के बग़ैर भी!”

  1. अत्यंत कड़वा सच

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    1. जी, बिलकुल।

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