जीत से इंकार करूँ!

सामने तेरे करूँ हार का अपनी एलान,

और अकेले में तिरी जीत से इंकार करूँ|

निदा फ़ाज़ली

One response to “जीत से इंकार करूँ!”

  1. बहुत सुंदर।

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