चाँदनी के हाथों में!

सुपुर्द करके उसे चाँदनी के हाथों में,

मैं अपने घर के अँधेरों को लौट आऊँगी|

परवीन शाकिर

One response to “चाँदनी के हाथों में!”

Leave a reply to yagneshthakore Cancel reply