बे-क़रार कोई तो हो!

न हरीफ़-ए-जाँ न शरीक-ए-ग़म शब-ए-इंतिज़ार कोई तो हो,

किसे बज़्म-ए-शौक़ में लाएँ हम दिल-ए-बे-क़रार कोई तो हो|

अहमद फ़राज़

2 responses to “बे-क़रार कोई तो हो!”

  1. वाह वाह।

    Liked by 1 person

    1. हार्दिक धन्यवाद जी।

      Like

Leave a comment