ऐसा गीत क्यूँ गाया!

हम जिसे गुनगुना नहीं सकते,

वक़्त ने ऐसा गीत क्यूँ गाया|   

जावेद अख़्तर

2 responses to “ऐसा गीत क्यूँ गाया!”

  1. बहुत सुंदर।

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    1. हार्दिक धन्यवाद जी।

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