ख़त हमसे लिखवाए!

मगर लिखवाए कोई उसको ख़त तो हम से लिखवाए,

हुई सुब्ह और घर से कान पर रख कर क़लम निकले|

मिर्ज़ा ग़ालिब

2 responses to “ख़त हमसे लिखवाए!”

    1. Hardik dhanyavad ji

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