इख़्तियार भी रख!

ख़ुदा के हाथ में मत सौंप सारे कामों को,

बदलते वक़्त पे कुछ अपना इख़्तियार भी रख|

निदा फ़ाज़ली

2 responses to “इख़्तियार भी रख!”

  1. बहुत सुंदर

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    1. हार्दिक धन्यवाद जी।

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