रह गई मुश्ताक़!

तमाम बज़्म जिसे सुन के रह गई मुश्ताक़,

कहो वो तज़्किरा-ए-ना-तमाम किस का था|

दाग़ देहलवी

2 responses to “रह गई मुश्ताक़!”

  1. बहुत सुंदर।

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    1. हार्दिक धन्यवाद जी।

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