मेरे ये ग़ज़ल के मिसरे!

दर-ओ-दीवार हैं मेरे ये ग़ज़ल के मिसरे,

क्या सुख़न-वर से सुख़न-वर का पता पूछता है|    

राजेश रेड्डी

One response to “मेरे ये ग़ज़ल के मिसरे!”

  1. 👋💯

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