मौजों पे इख़्तियार न हो

हवा ख़िलाफ़ हो मौजों पे इख़्तियार न हो,

ये कैसी ज़िद है कि दरिया किसी से पार न हो|

वसीम बरेलवी

One response to “मौजों पे इख़्तियार न हो”

  1. christinenovalarue avatar
    christinenovalarue

    💜

    Liked by 1 person

Leave a comment