भर दिया जाम!

प्रसिद्ध हिन्दी गीत कवि और संपादक श्री बालस्वरूप राही जी का एक गीत मैं आज प्रस्तुत कर रहा हूँ| राही जी की कुछ रचनाएं मैंने पहले भी शेयर की हैं|

लीजिए आज प्रस्तुत है श्री बालस्वरूप राही जी का यह गीत  

भर दिया जाम जब तुमने अपने हाथों से
प्रिय! बोलो, मैं इंकार करूँ भी तो कैसे

वैसे तो मैं कब का दुनिया से ऊब चुका
मेरा जीवन दुख के सागर में डूब चुका
पर प्राण, आज सिरहाने तुम आ बैठीं तो
मैं सोच रहा हूँ हाय, मरूँ भी तो कैसे।

मंज़िल अनजानी, पथ की भी पहचान नहीं
है थकी-थकी-सी सांस, पांव में जान नहीं
पर जब तक तुम चल रहीं साथ मधुरे, मेरे
मैं हार मान अपनी ठहरूँ भी तो कैसे।

मंझधार बहुत गहरी है, पतवारें टूटी,
यह नाव समझ लो, अब डूबी या तब डूबी
पर यह जो तुमने पाल तान फ़ी आँचल की
अब मैं लहरों से प्राण, डरूं भी तो कैसे

भर दिया जाम जब तुमने अपने हाथों से
प्रिय! बोलो, मैं इंकार करूँ भी तो कैसे।

(आभार- एक बात मैं और बताना चाहूँगा कि अपनी ब्लॉग पोस्ट्स में मैं जो कविताएं, ग़ज़लें, शेर आदि शेयर करता हूँ उनको मैं सामान्यतः ऑनलाइन उपलब्ध ‘कविता कोश’ अथवा ‘Rekhta’ से लेता हूँ|)

आज के लिए इतना ही,

नमस्कार|                                         

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One response to “भर दिया जाम!”

  1. christinenovalarue avatar
    christinenovalarue

    💜

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