तेरे रंग-ए-लब से है

अगर शरर है तो भड़के जो फूल है तो खिले,

तरह तरह की तलब तेरे रंग-ए-लब से है|

फ़ैज़ अहमद फ़ैज़

2 responses to “तेरे रंग-ए-लब से है”

  1. वाह वाह।

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    1. हार्दिक धन्यवाद जी।

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