रीती गागर का क्या होगा!

आज फिर से मैं जिनको हिन्दी में गीतों के राजकुंवर के नाम से जाना जाता है, ऐसे स्वर्गीय गोपाल दास नीरज जी का एक गीत शेयर कर रहा हूँ| नीरज जी कवि सम्मेलनों की शान हुआ करते थे और हिन्दी फ़िल्मों के लिए भी उन्होंने कुछ अमर गीत लिखे हैं| नीरज जी की कुछ रचनाएं मैंने पहले भी शेयर की हैं|

लीजिए आज प्रस्तुत है स्वर्गीय गोपाल दास नीरज जी का यह गीत  

माखन चोरी कर तूने कम तो कर दिया बोझ ग्वालिन का
लेकिन मेरे श्याम बता अब रीति गागर का क्या होगा?

    युग-युग चली उमर की मथनी,
    तब झलकी घट में चिकनाई,
    पीर-पीर जब साँस उठी जब
    तब जाकर मटकी भर पाई,

    एक कंकड़ी तेरे कर की
    किन्तु न जाने आ किस दिशि से
    पलक मारते लूट ले गयी
    जनम-जनम की सकल कमाई
पर है कुछ न शिकायत तुझसे, केवल इतना ही बतला दे,
मोती सब चुग गया हंस तब मानसरोवर का क्या होगा?
    माखन चोरी कर तूने…

    सजने से तो सज आती है
    मिट्टी हर घर एक रतन से,
    शोभा होती किन्तु और ही
    मटकी की टटके माखन से,

    इस द्वारे से उस द्वारे तक,
    इस पनघट से उस पनघट तक
    रीता घट है बोझ धरा पर
    निर्मित हो चाहे कंचन से,
फिर भी कुछ न मुझे दुःख अपना, चिंता यदि कुछ है तो यह है,
वंशी धुनी बजाएगा जो, उस वंशीधर का क्या होगा?
    माखन चोरी कर तूने…

    दुनिया रस की हाट सभी को
    ख़ोज यहाँ रस की क्षण-क्षण है,
    रस का ही तो भोग जनम है
    रस का हीं तो त्याग मरण है,

    और सकल धन धूल, सत्य
    तो धन है बस नवनीत ह्रदय का,
    वही नहीं यदि पास, बड़े से
    बड़ा धनी फिर तो निर्धन है,
अब न नचेगी यह गूजरिया, ले जा अपनी कुर्ती-फरिया,
रितु ही जब रसहीन हुई तो पंचरंग चूनर का क्या होगा?
    माखन चोरी कर तूने…

    देख समय हो गया पैंठ का
    पथ पर निकल पड़ी हर मटकी
    केवल मैं ही निज देहरी पर
    सहमी-सकुची, अटकी-भटकी,

    पता नहीं जब गोरस कुछ भी
    कैसे तेरे गोकुल आऊँ ?
    कैसे इतनी ग्वालनियों में
    लाज बचाऊँ अपने घट की ,
या तो इसको फिर से भर दे या इसके सौ टुकड़े कर दे,
निर्गुण जब हो गया सगुण तब इस आडम्बर का क्या होगा?
    माखन चोरी कर तूने…

    जब तक थी भरपूर मटकिया
    सौ-सौ चोर खड़े थे द्वारे,
    अनगिन चिंताएँ थी मन में
    गेह खड़े थे लाख किवाड़े

    किन्तु कट गई अब हर साँकल
    और हो गई हल हर मुश्किल,
    अब परवाह नहीं इतनी भी
    नाव लगे किस नदी किनारे,
सुख-दुःख हुए समान सभी, पर एक प्रश्न फिर भी बाक़ी है
वीतराग हो गया मनुज तो, बूढ़े ईश्वर का क्या होगा?
    माखन चोरी कर तूने…

आज के लिए इतना ही,

नमस्कार|                                         

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One response to “रीती गागर का क्या होगा!”

  1. christinenovalarue avatar
    christinenovalarue

    💗

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