उरूस-ए-दहर* चले खा के ठोकरें लेकिन,
क़दम क़दम पे जवानी उबल तो सकती है|
*Top of the world
फ़िराक़ गोरखपुरी
A sky full of cotton beads like clouds
उरूस-ए-दहर* चले खा के ठोकरें लेकिन,
क़दम क़दम पे जवानी उबल तो सकती है|
*Top of the world
फ़िराक़ गोरखपुरी
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