आवारा, छलिया, अनाड़ी, दीवाना!

आज एक बार फिर मैं अपनी एक पुरानी ब्लॉग पोस्ट शेयर कर रहा हूँ|

हाल ही में मैंने अपने प्रिय गायक मुकेश जी की पुण्य तिथि पर उनका एक गीत शेयर किया था| आज मन है कि स्वर्गीय राज कपूर जी के साथ उनके अंतरंग संबंध को याद करूं| राजकपूर जी के अधिकांश गाने मुकेश जी ने गाए थे| राज कपूर जी और मुकेश जी मानो दो जिस्म एक जान थे| जब मुकेश जी की मृत्यु हुई तब राज साहब ने कहा था कि मेरी तो आवाज़ ही चली गई! जिस्म रह गया है और आत्मा जा चुकी है| एक बड़ा ही सुरीला समूह था| राज साहब, मुकेश जी, शैलेंद्र-हसरत जयपुरी, शंकर जयकिशन, लक्ष्मीकान्त प्यारेलाल आदि|


मुकेश साहब क्योंकि राज साहब की फिल्मी यात्रा के हमसफर थे, इसीलिए यह गीत जिसमें राज साहब की कुछ भूमिकाओं का ज़िक्र किया गया है, कल्लू-क़व्वाल के बहाने से, इसे भी अभिव्यक्ति मुकेश जी ने दी है| वर्ष 1964 में रिलीज़ हुई फिल्म- दूल्हा-दुल्हन के लिए, गुलशन बावरा जी का लिखा यह गीत मुकेश जी और लता मंगेशकर जी ने बड़े सुंदर ढंग से – कल्याणजी-आनंदजी के संगीत निर्देशन में गाया था| कल्याणजी आनंदजी का भी मुकेश जी के साथ काफी अच्छा साथ रहा है|

एक बात और राज कपूर साहब ने साधारण इन्सानों की भूमिकाएँ बहुत निभाई हैं, जैसे कोई गाँव से आया है नौकरी की तलाश में और कैसे सीधेपन से वह चालाकी की तरफ बढ़ता है| यहाँ तक कि जेबकतरा भी- ‘शहजादे तलवार से खेले, मैं अश्कों से खेलूँ’|


लीजिए प्रस्तुत हैं इस मधुर गीत के बोल –

मुझे कहते हैं कल्लू कव्वाल-कल्लू कव्वाल
कि तेरा मेरा तेरा मेरा साथ रहेगा|


मैं हूँ ठुमरी तो तू है ख़याल
तेरा मेरा साथ रहेगा|

मुझे कहते हैं कल्लू क़व्वाल|


-राजा मैं गीतों का तू सुर की रानी
तू सुर की रानी

गा के सुनाएं हम अपनी कहानी,
अपनी कहानी|

-तू मेरे गीतों की है ज़िंदगानी


-तेरे गीतों में
तेरे गीतों में है वो कमाल, ओ कल्लू कव्वाल
तेरा मेरा …


-सूरत से पहचाने, मुझको ज़माना
मुझको ज़माना|

आवारा छलिया अनाड़ी दीवाना
अनाड़ी दीवाना|


कैसा हूँ दिल का किसी ने न जाना|

-नहीं दुनिया में तेरी मिसाल ओ कल्लू कव्वाल
तेरा मेरा मेरा साथ रहेगा|



आज के लिए इतना ही,
नमस्कार|

One response to “आवारा, छलिया, अनाड़ी, दीवाना!”

  1. christinenovalarue avatar
    christinenovalarue

    🖤

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