मजबूरियाँ, तन्हाइयाँ!

  ज़िंदगी शायद इसी का नाम है,

दूरियाँ, मजबूरियाँ, तन्हाइयाँ|

कैफ़ भोपाली

2 responses to “मजबूरियाँ, तन्हाइयाँ!”

  1. वाह वाह।

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    1. हार्दिक धन्यवाद जी।

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