किसी का ग़ुलाम है!

बड़े शौक़ से मिरा घर जला कोई आँच तुझ पे न आएगी,

ये ज़बाँ किसी ने ख़रीद ली ये क़लम किसी का ग़ुलाम है|

बशीर बद्र

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