चाँद पे परियाँ रहती थीं!

मुझको यकीं है सच कहती थी, जो भी अम्मी कहती थी,
जब मेरे बचपन के दिन थे, चाँद पे परियाँ रहती थीं|

जावेद अख़्तर

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