
हिज्र की रुत जाँ-लेवा थी पर ग़लत सभी अंदाज़े निकले,
ताज़ा रिफ़ाक़त* के मौसम तक मैं भी जिया हूँ वो भी जिया है|
* Companionship
अहमद फ़राज़
A sky full of cotton beads like clouds

हिज्र की रुत जाँ-लेवा थी पर ग़लत सभी अंदाज़े निकले,
ताज़ा रिफ़ाक़त* के मौसम तक मैं भी जिया हूँ वो भी जिया है|
* Companionship
अहमद फ़राज़
Leave a comment