मैं भी जिया हूँ वो भी जिया है!

हिज्र की रुत जाँ-लेवा थी पर ग़लत सभी अंदाज़े निकले,
ताज़ा रिफ़ाक़त* के मौसम तक मैं भी जिया हूँ वो भी जिया है|
* Companionship
अहमद फ़राज़

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