जरा सा क़तरा!

जरा सा क़तरा कहीं आज अगर उभरता है,
समंदरो ही के लहजे में बात करता है।

वसीम बरेलवी

2 responses to “जरा सा क़तरा!”

  1. वाह, वाह |

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    1. shri.krishna.sharma avatar
      shri.krishna.sharma

      बहुत बहुत धन्यवाद जी।

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