
जरा सा क़तरा कहीं आज अगर उभरता है,
समंदरो ही के लहजे में बात करता है।
वसीम बरेलवी
A sky full of cotton beads like clouds

जरा सा क़तरा कहीं आज अगर उभरता है,
समंदरो ही के लहजे में बात करता है।
वसीम बरेलवी
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