आज फिर से मैं, मुकेश जी और लता मंगेशकर जी के गाये एक युगल गीत के बोल प्रस्तुत कर रहा हूँ, यह गीत फिल्म ‘फिल्म-होली आई रे’ के लिए लिखा था क़मर जलालाबादी साहब ने और इसका मधुर संगीत तैयार किया था कल्याणजी-आनंदजी की प्रसिद्ध जोड़ी ने|
लीजिए प्रस्तुत है मुकेश जी और लता जी के स्वर में, हमारी स्मृतियों में बसा यह मधुर गीत:

मुकेश- मेरी तमन्नाओं की तक़दीर तुम सँवार दो
प्यासी है ज़िंदगी और मुझे प्यार दो|
नील गगन मण्डप है सारा जग बराती
मन के फेरे सच्चे, सच्चे हैं हम साथी
लाज का ये घूँघट पट आज तो उतार दो
प्यासी है ज़िंदगी …
धरती करवट बदले, बदले हर मौसम
प्रीत के पुजारी हैं बदलेंगे नहीं हम
पतझड़ सा जीवन है, प्यार की बहार दो
प्यासी है ज़िंदगी …
लता- मेरी तमन्नाओं की तकदीर तुम सँवार दो
प्यासी है ज़िन्दगी तुम मुझे प्यार दो|
प्यार का अकाल पड़ा सारे ही जग में
धोखे हुए हर दिल में, नफ़रत है रग-रग में
सबने डुबोया है मुझे, पार तुम उतार दो|
खुशी यहाँ थोड़ी सी और बहुत ग़म हैं
जितना भी प्यार मिले, उतना ही कम है
ग़म से भरे जीवन को प्यार से निखार दो|
प्यासी है ज़िन्दगी तुम मुझे प्यार दो|
आज के लिए इतना ही,
नमस्कार
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