
किसको पत्थर मारूँ ‘क़ैसर’ कौन पराया है,
शीश-महल में एक एक चेहरा अपना लगता है|
क़ैसर उल जाफ़री
A sky full of cotton beads like clouds

किसको पत्थर मारूँ ‘क़ैसर’ कौन पराया है,
शीश-महल में एक एक चेहरा अपना लगता है|
क़ैसर उल जाफ़री
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