एक बार फिर से मैं हम सबके प्यारे मुकेश जी का गाया एक और बहुत प्यारा गीत शेयर कर रहा हूँ जो राग मारू बिहाग पर आधारित है |
फिल्म ‘एक फूल चार कांटे’ के लिए शैलेन्द्र जी के लिखे इस गीत को शंकर जयकिशन की सुरीली जोड़ी के संगीत निर्देशन में मुकेश जी ने लाज़वाब अंदाज़ में गाया है|
लीजिए प्रस्तुत है मुकेश जी का यह अलग तरह का गीत:
मतवाली नार ठुमक ठुमक चली जाये
इन कदमों पे किस का जिया ना झुक जाये
मतवाली नार …
फूल बदन मुखड़ा यूँ दमके
बादल में ज्यों बिजली चमके
गीत सुना के तू छम छम के
ललचाये, छुप जाये, आय हाय
मतवाली नार …
ये चंचल कजरारी आंखें
ये चितचोर शिकारी आंखें
गई दिल चीर कटारी आंखें
मुस्काये, शरमाये, झुक जाये
मतवाली नार …
आज के लिए इतना ही,
नमस्कार
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