मगर वो कोई फ़ैसला तो सुना दें!

ज़नाब सुदर्शन फ़ाक़िर साहब एक श्रेष्ठ शायर रहे हैं, उनके बहुत सुंदर गीत, ग़ज़लें आदि विभिन्न गायकों ने गायी हैं| वैसे कवि शायर आदि भी अजीब लोग होते हैं, एक मामूली सी अदा के लिए वे कुछ भी कुर्बान करने को तैयार हो जाते हैं, कम से कम कविता और शायरी में तो ऐसा ही होता है|

आज मैं सुदर्शन फ़ाकिर साहब की जो ग़ज़ल शेयर कर रहा हूँ, वह बहुत सुंदर ग़ज़ल है और इसे स्वर्गीय जगजीत सिंह जी और चित्रा सिंह जी ने भी गाया था| लीजिए प्रस्तुत है ये ग़ज़ल –


अगर हम कहें और वो मुस्कुरा दें
हम उनके लिए ज़िंदगानी लुटा दें

हर एक मोड़ पर हम ग़मों को सज़ा दें
चलो ज़िन्दगी को मोहब्बत बना दें

अगर ख़ुद को भूले तो, कुछ भी न भूले
कि चाहत में उनकी, ख़ुदा को भुला दें

कभी ग़म की आँधी, जिन्हें छू न पाये
वफ़ाओं के हम, वो नशेमन बना दें

क़यामत के दीवाने कहते हैं हमसे
चलो उनके चहरे से पर्दा हटा दें

सज़ा दें, सिला दें, बना दें, मिटा दें
मगर वो कोई फ़ैसला तो सुना दें



आज के लिए इतना ही,
नमस्कार|
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2 responses to “मगर वो कोई फ़ैसला तो सुना दें!”

    1. shri.krishna.sharma avatar
      shri.krishna.sharma

      Thanks a lot ji.

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