लीडर याने जांबवंत!

दीपावली आ रही है, श्रीराम जी के लंका पर विजय के बाद, और वनवास की अवधि पूरी होने पर अयोध्या लौटने पर खुशी का पर्व, जिसमें अमावस्या की काली रात को दीयों और रोशनी से जगमग कर दिया जाता है|


मुझे अचानक याद आया कि लंका विजय से पहले किसी दूत को वहाँ जाना था, माता सीता की सुधि लेने के लिए और लंका की व्यूह रचना जानने के लिए| ऐसे में समुद्र लांघकर लंका में जाने की आवश्यकता थी, जिसके लिए आकाश मार्ग से, आज कि लिहाज से देखें तो 30-40 किलोमीटर जाना था|


ऐसे में रामजी के सब सैनिक, जो सुग्रीव की वानर सेना से थे, और उनका नायक था- जांबवंत जो रिक्ष (भालू) प्रजाति से था| वहाँ ऐसा कोई विवाद नहीं हुआ कि बहुमत तो वानरों का है, फिर उनका नायक भालू कैसे हो सकता है|


सब लोग समुद्र के किनारे जाकर बैठ गए, कोई यह नहीं सोच पा रहा था कि अब आगे कैसे बढ़ा जाए, समुद्र पर इस विशाल दूरी को कैसे पार किया जाए| ऐसे में जांबवंत जो वास्तविक अर्थों में एक नायक हैं, वह हनुमान जी को उनकी छिपी हुई शक्तियों का स्मरण कराते हैं उनको बताते हैं कि इसी काम के लिए उनका अवतार हुआ है|


वास्तव में जो सच्चा नायक होता है, वह अपने साथियों को उनकी शक्तियों का एहसास कराता है और उनका सही उपयोग करने के लिए प्रेरित करता है|
इसके बाद हनुमान जी लंका में जो कुछ चमत्कार करते हैं, हम सब उनको जानते हैं| एक बात का उल्लेख करना चाहूँगा कि राक्षसों का वध करने के लिए वे विशाल रूप धारण करते हैं और माता सीता के सामने विनम्रता वश ‘लघु रूप’ में आ जाते हैं|


इसके बाद में जांबवंत जी की सच्चे नायक वाली भूमिका का उल्लेख करना चाहूँगा| वे श्रीरामजी को हनुमान जी के चमत्कारों के बारे में बताते हैं| यहाँ कुछ पंक्ति उद्धृत करना चाहूँगा, श्रीरामचरित मानस से-


पवन तनय के चरित सुहाए, जांबवंत रघुपतिहि सुनाए,
सुनत कृपानिधि मन अति भाए, कर गहि परम निकट बैठाए|
सुनु कपि तोही समान उपकारी, नहिं कोई सुर, नर, मुनि तनधारी,
प्रति उपकार करहूँ का तोरा, सन्मुख होई न सकत जिय मोरा|


मन होता है कि यहाँ कुछ और पंक्तियाँ उद्धृत करूं, लेकिन फिलहाल इतना ही ठीक है| यहाँ जो उल्लेखनीय है, वो यह कि जांबवंत जी हनुमान जी के कार्यों की प्रशंसा करते हैं, जबकि आज का कोई लीडर होता तो वह अपने अधीनस्थ को पीछे करके कहता कि मैंने ही सब कुछ किया है|


इसके लिए मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम जी, हनुमान जी की इतनी प्रशंसा करते हैं कि उसको सुनकर हनुमान जी की आँखों में आँसू आ जाते हैं| यह भी सत्य है कि श्रीराम जी का हनुमान जी से बड़ा कोई भक्त नहीं है|


अंत में प्रभु श्रीराम जी के एक गुण का ज़िक्र करके बात समाप्त करूंगा| गोस्वामी जी ने, श्रीराम जी के बारे में लिखा है-


कोमल चित अति दीन-दयाला,
कारण बिनु रघुनाथ कृपाला|


स्वार्थ वश, कुछ पाने के बदले कृपा जो करते हैं, वो कृपा नहीं होती, श्रीराम जी का तो स्वभाव ही कृपा करने वाला है|


अंत में तुलसी के राम की एक और परिकल्पना का उल्लेख करना चाहूँगा-


विस्वरूप रघुवंशमणि, करहु वचन विश्वास!

तुलसीदास जी कहते हैं कि यह जो दुनिया है, यही प्रभु श्रीराम का स्वरूप है| यदि हम किसी जीव का भला करते हैं, तो वह प्रभु की सेवा है और यदि किसी को कष्ट देते हैं, तो उससे हम प्रभु श्रीराम को नाराज़ करते हैं|


आज ऐसे ही जांबवंत जी के बहाने से कुछ कहने का मन हुआ सो कह दिया|
नमस्कार


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10 responses to “लीडर याने जांबवंत!”

  1. very impressive writing about jamvant.. he is the man who showed the way to find out Sita Mata..

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    1. shri.krishna.sharma avatar
      shri.krishna.sharma

      Thanks a lot.

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  2. Jay shree raam Happy diwali

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    1. shri.krishna.sharma avatar
      shri.krishna.sharma

      Happy Diwali to you also.

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  3. JAI SHRI RAM. May this DIWALI bestows us all PEACE & PROSPERITY. Wonderful sharing indeed.

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    1. shri.krishna.sharma avatar
      shri.krishna.sharma

      Thanks a lot ji, Happy Diwali to you also.

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      1. My grateful thanks to your for your invaluable comments. May this DIWALI brings us PEACE & PROSPERITY TO ALL.

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      2. My grateful thanks to you for appraising the write-up and for your wishes. I heartily reciprocate the feelings and pray for PEACE & PROSPERITY for you and your dear ones.

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      3. shri.krishna.sharma avatar
        shri.krishna.sharma

        Thanks again ji, wish you a very Happy Diwali.

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      4. Thanks a lot Shri Krishna sir for your good wishes. I reciprocate the feelings and wish you PEACE AND PROSPERITY.

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