मेरी थकन उतर जाती है!

हिन्दी काव्य मंचों के प्रमुख एवं लोकप्रिय कवियों की रचनाएँ प्रस्तुत करने के क्रम में आज मैं स्वर्गीय रामावतार त्यागी जी का एक गीत प्रस्तुत कर रहा हूँ| रामावतार त्यागी जी स्वाभिमान से भरी, एवं ओजपूर्ण कविताएं लिखने के लिए विख्यात थे|


लीजिए प्रस्तुत है स्वर्गीय रामावतार त्यागी जी का यह गीत- –

हारे थके मुसाफिर के चरणों को धोकर पी लेने से,
मैंने अक्सर यह देखा है, मेरी थकन उतर जाती है।

कोई ठोकर लगी अचानक, जब-जब चला सावधानी से,
पर बेहोशी में मंजिल तक, जा पहुँचा हूँ आसानी से,
रोने वाले के अधरों पर, अपनी मुरली धर देने से,
मैंने अक्सर यह देखा है, मेरी तृष्णा मर जाती है॥


प्यासे अधरों के बिन परसे, पुण्य नहीं मिलता पानी को,
याचक का आशीष लिये बिन, स्वर्ग नहीं मिलता दानी को,
खाली पात्र किसी का अपनी, प्यास बुझा कर भर देने से,
मैंने अक्सर यह देखा है, मेरी गागर भर जाती है॥

लालच दिया मुक्ति का जिसने, वह ईश्वर पूजना नहीं है,
बन कर वेदमंत्र-सा मुझको, मंदिर में गूँजना नहीं है,
संकटग्रस्त किसी नाविक को, निज पतवार थमा देने से,
मैंने अक्सर यह देखा है ,मेरी नौका तर जाती है॥


आज के लिए इतना ही,
नमस्कार|


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4 responses to “मेरी थकन उतर जाती है!”

  1. “रोने वाले के अधरों पर, अपनी मुरली धर देने से,
    मैंने अक्सर यह देखा है, मेरी तृष्णा मर जाती है॥

    संकटग्रस्त किसी नाविक को, निज पतवार थमा देने से,
    मैंने अक्सर यह देखा है ,मेरी नौका तर जाती है॥”

    ये कुछ पंक्तियां तो दिल को छू गई,बहुत ही सुंदर गीत है।

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    1. shri.krishna.sharma avatar
      shri.krishna.sharma

      Thanks Harina ji, he was as among the most popular stage poets of his time.

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    1. shri.krishna.sharma avatar
      shri.krishna.sharma

      Very true, thanks.

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