मुंबई में दूसरा दिन निकल गया, कहीं ज्यादा निकलने की हिम्मत नहीं हुई। फिर सोचा कि शुरुआत अगर की जाए कुछ देखने की, शेयर करने की, तो प्रवेश स्थल से ही की जाए न। एक ऐसा प्रवेश द्वार जो सौ वर्ष से अधिक समय से, जलमार्ग द्वारा मुंबई, जो कि पहले बंबई थी वहाँ, बल्कि भारतवर्ष में आने वाले लोगों के लिए प्रवेश-स्थल था।

वैसे तो मुगलों द्वारा अपने शासन के दौरान अनेक नगरों जैसे दिल्ली, जयपुर आदि-आदि में बहुत से द्वार अथवा गेट बनावाए गए हैं। अंग्रेजों द्वारा बनवाए गए दो गेट प्रमुख हैं, मुंबई में ‘गेटवे ऑफ इंडिया’ और दिल्ली में ‘इंडिया गेट’। जबकि ‘इंडिया गेट’ युद्ध में हुए शहीदों की स्मृति को अमर करने के लिए बनाया गया था और वहाँ अमर जवान ज्योति भी स्वतंत्र भारत में प्रज्ज्वलित की गई, मुंबई का ‘गेटवे ऑफ इंडिया’ वास्तव में विदेशों से समुद्र मार्ग द्वारा आने वालों के लिए प्रवेश स्थल रहा है।

एक फिल्म याद आती है जिसमें नवाज़ुद्दीन सिद्दीक़ी ‘गेटवे ऑफ इंडिया’ पर फोटोग्राफी करते हैं और इस प्रक्रिया में उनको हीरोइन मिल जाती है, शायद इस उम्मीद में अभी भी कुछ फोटोग्राफर वहाँ अपनी किस्मत आज़माते हों, परंतु अब स्मार्टफोन के स्मार्ट कैमरों के कारण सभी लोग आत्म निर्भर हो गए हैं और इन बेचारे फोटोग्राफरों के लिए अब बहुत कुछ नहीं बचा है। वैसे तो मोदी जी ने भी ‘सैल्फी’ को लोकप्रिय बनाने में बड़ी भूमिका निभाई है।

समुद्रतट पर बना यह विशाल गेट स्थापत्य कला का अनूठा नमूना है, 1924 में बनकर तैयार हुए इस गेट के बारे में कहा जाता है कि यह गेट ब्रिटिश शासक के स्वागत में तैयार किया गया था, परंतु आज यह भारतीय शान का प्रतीक है।
गेटवे ऑफ इंडिया के सामने ही भारतीय उद्योगपति टाटा द्वारा तैयार कराया गया और संचालित ‘ताजमहल होटल’ है जिसका पुराना और नया भवन अपने आप में प्राचीन और आधुनिक स्थापत्य कला के उदाहरण हैं। मुझे याद है कि जब मैं मुंबई में रहता था, तब एक बार मुंबई में टेस्ट मैच चल रहा था और इस होटल में ऑस्ट्रेलिया की क्रिकेट टीम ठहरी हुई थी। बहुत सारे लोगों की भीड़ उन खिलाड़ियों को निकट से देखने के लिए इकट्ठा हुई थी, जिनमें मेरा बेटा भी शामिल था।

ताजमहल होटल आज अपने आप में भारतीयों के साहस का प्रतीक भी बन गया है 26/11 के हमले के बाद, और उद्योगपति रतन टाटा ने इस हमले में घायल और शहीद हुए अपने कर्मियों के परिवारों का जिस प्रकार खयाल रखा वह वास्तव में एक श्रेष्ठ उद्योगपति का उदाहरण है।
हाँ गेटवे ऑफ इंडिया के पास ही दूसरी तरफ, लगभग 12 कि.मी. दूर समुद्र में ‘एलीफेंटा केव्स’ हैं जिनमें प्राचीन भारतीय मूर्तिकला को बहुत सुंदर रूप से प्रस्तुत किया गया है, पहाड़ियों को काटकर बनाई गई ये गुफाएं भी सैलानियों को काफी आकर्षित करती हैं।

इसके अलावा एक स्थान और जो इनके पास ही है और भारतवर्ष में रेल यातायात से जुड़ा एक प्रमुख स्टेशन है और मुंबई की तो जीवन-रेखा कही जाती है- मुंबई लोकल, दोनो का यह प्रमुख केंद्र है और साथ ही इसका भवन भी प्राचीन स्थापत्य कला का नमूना है- मुंबई- सीएसटी स्टेशन, आप भले ही टैक्सी से भ्रमण करें, लेकिन यहाँ भी अवश्य जाएं, वैसे लोकल और अब मैट्रो भी, इनके द्वारा आपकी यात्रा अधिक गति से हो पाएगी, बशर्ते आप रूट जानते हों और लोकल आदि से अपना पर्स और कीमती सामान लेकर सुरक्षित बाहर निकलना सुनिश्चित कर सकते हों।

आज के लिए इतना ही, आगे अगर और स्थान देखने का मौका मिलेगा तो उनके बारे में भी अपने विचार प्रस्तुत करूंगा।
नमस्कार।
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