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A sky full of cotton beads like clouds

    • 81. सरेआम अमानवीयता
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  • 17th Mar 2025

    ऐ मोहब्बत तू इक!

    ऐ मोहब्बत तू इक अज़ाब सही,ज़िंदगी बे तिरे जहन्नम है| फ़िराक़ गोरखपुरी

  • 17th Mar 2025

    ज़िंदगी का मातम है!

    ये भी नज़्म-ए-हयात है कोई,ज़िंदगी ज़िंदगी का मातम है| फ़िराक़ गोरखपुरी

  • 17th Mar 2025

    छुट्टियाँ होती हैं लेकिन!

    आज मैं हिंदी के श्रेष्ठ कवि स्वर्गीय कैलाश गौतम जी का एक नवगीत शेयर कर रहा हूँ। कैलाश जी अनेक रचनाएं मैंने पहले भी शेयर की हैं। लीजिए आज प्रस्तुत है स्वर्गीय कैलाश गौतम जी का यह नवगीत – छुट्टियाँ होती हैं लेकिनक्या बताएँ छुट्टियों में हमअब नहीं घर से निकलते रंग लेकर राग लेकर…

  • 16th Mar 2025

    उठने वाली है!

    उठने वाली है बज़्म माज़ी की, रौशनी कम है ज़िंदगी कम है| फ़िराक़ गोरखपुरी

  • 16th Mar 2025

    ज़िंदगी इंक़लाब!

    इस में ठहराव या सुकून कहाँ,ज़िंदगी इंक़लाब-ए-पैहम है| फ़िराक़ गोरखपुरी

  • 16th Mar 2025

    इश्क़ करना गुनाह!

    उस के शैतान को कहाँ तौफ़ीक़,‘इश्क़ करना गुनाह-ए-आदम है| फ़िराक़ गोरखपुरी

  • 16th Mar 2025

    आग में जो पड़ा!

    आग में जो पड़ा वो आग हुआ,हुस्न-ए-सोज़-ए-निहाँ मुजस्सम है| फ़िराक़ गोरखपुरी

  • 16th Mar 2025

    अपने ग़म का मुझे !

    अपने ग़म का मुझे कहाँ ग़म है,ऐ कि तेरी ख़ुशी मुक़द्दम है| फ़िराक़ गोरखपुरी

  • 16th Mar 2025

    जाने का उस के रंज!

    उस आख़िरी नज़र में अजब दर्द था ‘मुनीर’,जाने का उस के रंज मुझे उम्र भर रहा| मुनीर नियाज़ी

  • 16th Mar 2025

    यही दिल में डर रहा!

    ख़ौफ़ आसमाँ के साथ था सर पर झुका हुआ,कोई है भी या नहीं है यही दिल में डर रहा| मुनीर नियाज़ी

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