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SamaySakshi

A sky full of cotton beads like clouds

    • 81. सरेआम अमानवीयता
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  • 24th Jun 2025

    कारवान-ए-हिम्मत!

    कारवान-ए-हिम्मत-ए-जम्हूर बढ़ता ही गया,शहरयार-ओ-हुक्मराँ आते रहे जाते रहे| अली सरदार जाफ़री

  • 24th Jun 2025

    अपना परचम हम भी!

    आँधियाँ चलती रहें अफ़्लाक थर्राते रहे,अपना परचम हम भी तूफ़ानों में लहराते रहे| अली सरदार जाफ़री

  • 24th Jun 2025

    बाँझ हो जाएगी क्या!

    राम-ओ-गौतम की ज़मीं हुर्मत-ए-इंसाँ की अमीं,बाँझ हो जाएगी क्या ख़ून की बरसात के बा’द| अली सरदार जाफ़री

  • 24th Jun 2025

    बच गया है जो लहू !

    ऐ वतन ख़ाक-ए-वतन वो भी तुझे दे देंगे,बच गया है जो लहू अब के फ़सादात के बा’द| अली सरदार जाफ़री

  • 24th Jun 2025

    आए हम ‘ग़ालिब’-ओ!

    आए हम ‘ग़ालिब’-ओ-‘इक़बाल’ के नग़्मात के बा’द,‘मुसहफ़’-ए-इश्क़-ओ-जुनूँ हुस्न की आयात के बा’द| अली सरदार जाफ़री

  • 24th Jun 2025

    यह धरती कितना देती है!

    एक बार फिर से कविताएं शेयर करने का सिलसिला छायावाद युग से शुरू कर रहा हूँ। आज मैं प्रसिद्ध हिंदी कवि स्वर्गीय सुमित्रानंदन पंत जी की एक कविता शेयर कर रहा हूँ| पंत जी की अनेक रचनाएं मैंने पहले भी शेयर की हैं। लीजिए आज प्रस्तुत है स्वर्गीय सुमित्रानंदन पंत जी की यह कविता –…

  • 23rd Jun 2025

    दिल में अब सोज़!

    दिल में अब सोज़-ए-इंतिज़ार नहीं,शम-ए-उम्मीद बुझ गई हो क्या| जौन एलिया

  • 23rd Jun 2025

    तुम बहुत दूर!

    मेरे सब तंज़ बे-असर ही रहे,तुम बहुत दूर जा चुकी हो क्या| जौन एलिया

  • 23rd Jun 2025

    तेज़ रौशनी हो क्या!

    हाँ फ़ज़ा याँ की सोई सोई सी है,तो बहुत तेज़ रौशनी हो क्या| जौन एलिया

  • 23rd Jun 2025

    क्या कहा इश्क़!

    क्या कहा इश्क़ जावेदानी* है!आख़िरी बार मिल रही हो क्या|*Immortal जौन एलिया

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