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सुधि!
एक बार फिर से आज मैं छायावाद युग की एक प्रमुख कवियित्री स्वर्गीय महादेवी वर्मा जी की एक कविता प्रस्तुत कर रहा हूँ। महादेवी जी की अनेक रचनाएं मैंने पहले भी शेयर की हैं। लीजिए आज प्रस्तुत है स्वर्गीय महादेवी वर्मा जी का यह गीत– किस सुधिवसन्त का सुमनतीर,कर गया मुग्ध मानस अधीर? वेदना गगन…
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सीढ़ियाँ उतरने में!
दस्तकें भी देने पर दर अगर न खुलता हो, सीढ़ियाँ उतरने में देर कुछ तो लगती है| अमजद इस्लाम अमजद
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दास्तान बनने में!
दर्द की कहानी को इश्क़ के फ़साने को,दास्तान बनने में देर कुछ तो लगती है| अमजद इस्लाम अमजद
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बात है क़बीले की!
फ़र्द*की नहीं है ये बात है क़बीले की,गिर के फिर सँभलने में देर कुछ तो लगती है|*Person अमजद इस्लाम अमजद
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ख़ुश्क भी न हो पाई!
ख़ुश्क भी न हो पाई रौशनाई हर्फ़ों की,जान-ए-मन मुकरने में देर कुछ तो लगती है| अमजद इस्लाम अमजद
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हादिसा भी होने में !
हादिसा भी होने में वक़्त कुछ तो लेता है,बख़्त के बिगड़ने में देर कुछ तो लगती है| अमजद इस्लाम अमजद
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आँख के झपकने में!
आँख से न हटना तुम आँख के झपकने तक,आँख के झपकने में देर कुछ तो लगती है| अमजद इस्लाम अमजद
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रास्ते बदलने में!
हिज्र के दोराहे पर एक पल न ठहरा वो,रास्ते बदलने में देर कुछ तो लगती है| अमजद इस्लाम अमजद
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दूरियाँ सिमटने में!
दूरियाँ सिमटने में देर कुछ तो लगती है,रंजिशों के मिटने में देर कुछ तो लगती है| अमजद इस्लाम अमजद
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प्रलाप!
एक बार फिर से आज मैं छायावाद युग से एक प्रमुख स्तंभ स्वर्गीय सूर्यकांत त्रिपाठी निराला जी की एक कविता प्रस्तुत कर रहा हूँ। निराला जी की अनेक रचनाएं मैंने पहले भी शेयर की हैं। लीजिए आज प्रस्तुत है स्वर्गीय सूर्यकांत त्रिपाठी निराला जी की यह कविता– वीणानिन्दित वाणी बोल!संशय-अन्धकारमय पथ पर भूला प्रियतम तेरा–सुधाकर-विमल…