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SamaySakshi

A sky full of cotton beads like clouds

    • 81. सरेआम अमानवीयता
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  • 3rd Jul 2025

    बूँद में भी वो!

    बहर-ए-हस्ती भी जिस में खो जाए,बूँद में भी वो बे-करानी है| फ़िराक़ गोरखपुरी

  • 3rd Jul 2025

    बद-गुमानी है!

    कोई इज़हार-ए-ना-ख़ुशी भी नहीं,बद-गुमानी सी बद-गुमानी है| फ़िराक़ गोरखपुरी

  • 3rd Jul 2025

    आँख की जवानी है!

    मय-कदों के भी होश उड़ने लगे,क्या तिरी आँख की जवानी है| फ़िराक़ गोरखपुरी

  • 3rd Jul 2025

    ऐ लब-ए-नाज़!

    ऐ लब-ए-नाज़ क्या हैं वो असरार,ख़ामुशी जिन की तर्जुमानी है| फ़िराक़ गोरखपुरी

  • 3rd Jul 2025

    फ्लोरेंस और पीसा के बीच मार्ग पर लिखे गए कुछ छंद

    आज एक बार फिर मैं अपना किया हुआ एक प्रसिद्ध कविता का अनुवाद दोहरा रहा हूँ। आज मैं अंग्रेजी के प्रसिद्ध कवि लॉर्ड बॉयरन की एक और कविता का भावानुवाद और उसके बाद मूल कविता प्रस्तुत कर रहा हूँ। पहले प्रस्तुत है मेरे द्वारा किया गया कविता का भावानुवाद- फ्लोरेंस और पीसा के बीच मार्ग…

  • 2nd Jul 2025

    ग़म की पासबानी है!

    दिल मिरा और ये ग़म-ए-दुनिया,क्या तिरे ग़म की पासबानी है| फ़िराक़ गोरखपुरी

  • 2nd Jul 2025

    नौ-जवानी है!

    उन से ऐसे में जो न हो जाए,नौ-जवानी है नौ-जवानी है| फ़िराक़ गोरखपुरी

  • 2nd Jul 2025

    रोइए तो पानी है!

    ज़ब्त कीजे तो दिल है अँगारा,और अगर रोइए तो पानी है| फ़िराक़ गोरखपुरी

  • 2nd Jul 2025

    कहानी बहुत पुरानी है!

    आज भी सुन रहे हैं क़िस्सा-ए-इश्क़,गो कहानी बहुत पुरानी है| फ़िराक़ गोरखपुरी

  • 2nd Jul 2025

    दिल उसी ग़म की!

    दोनों आलम हैं जिस के ज़ेर-ए-नगीं,दिल उसी ग़म की राजधानी है| फ़िराक़ गोरखपुरी

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