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A sky full of cotton beads like clouds

    • 81. सरेआम अमानवीयता
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  • 17th Dec 2017

    119. धरती के कागज़ पर मेरी तस्वीर अधूरी रहनी थी!

    हिंदी के एक अत्यंत श्रेष्ठ गीतकार थे श्री भारत भूषण जी, मेरठ के रहने वाले थे और काव्य मंचों पर मधुरता बिखेरते थे। मैं यह नहीं कह सकता कि वे सबसे लोकप्रिय थे, परंतु जो लोग कवि-सम्मेलनों में कविता, गीतों के आस्वादन के लिए जाते थे, उनको भारत भूषण जी के गीतों से बहुत सुकून…

  • 15th Dec 2017

    118. ये धुआं सा कहाँ से उठता है!

    एक किस्सा याद आ रहा है, एक सज्जन थे, नशे के शौकीन थे, रात में सोते समय भी सिगरेट में नशा मिलाकर पीते थे, एक बार सुट्टे मारते-मारते सो गए, और बाद में अचानक उन्हें धुआं सा महसूस हुआ, कुछ देर तो सोचते रहे कि कहाँ से आ रहा है, बाद में पता चला कि…

  • 14th Dec 2017

    117. पतंगबाज़ी मुबारक!

    देश में कुछ अवसरों पर पतंगबाज़ी का माहौल बनता है, जिनमें से एक शायद मकर संक्रांति का अवसर है। आज से लेकर अगले दो-तीन दिनों तक भी देश में पतंगबाज़ी का माहौल रहने वाला है। यह पतंगबाज़ी होगी विभिन्न टीवी चैनलों पर जहाँ अलग-अलग एग्ज़िट पोल विशेषज्ञ अपने-अपने चुनाव परिणाम प्रस्तुत करेंगे और असली चुनाव…

  • 12th Dec 2017

    116. फिरता है चांदनी में कोई सच डरा-डरा!

    दुष्यंत कुमार जी का एक शेर है- खरगोश बनके दौड़ रहे हैं तमाम ख्वाब, फिरता है चांदनी में कोई सच डरा-डरा। यह शेर वैसे तो आपात्काल में लिखी गई उनकी गज़लों के संग्रह ‘साये में धूप’ से लिया गया है, जिस माहौल में यह शेर और भी अधिक गहन अर्थ ग्रहण करता है, परंतु यह…

  • 11th Dec 2017

    115. सुविधा की होड़ और विद्रोही मुद्राएं!

    आज अपने ही एक गीत के बहाने बात कर लेता हूँ। शायद मैंने यह कविता पहले भी शेयर की हो, जब मैंने शुरू के अपने ब्लॉग, अपने जीवन के विभिन्न चरणों के बहाने, अपने बचपन से प्रारंभ करके लिखे थे, उस समय तो यहाँ ब्लॉग की साइट पर मैं खुद ही लिखने वाला और खुद…

  • 10th Dec 2017

    114. वो कर रहा था मुरव्वत भी दिल्लगी की तरह!

    कुछ विषय ऐसे हैं, कि जब आपके पास बात करने के लिए कोई विषय न हो, तब आप इनको लेकर अपना स्वेटर या कहें कि आलेख बुन सकते हैं। जैसे एक विषय है मौसम, दूसरा है प्यार! वैसे प्यार कौन नहीं करता और किसका काम चल पाता है बिना प्यार के? लेकिन कविता, गीत, शायरी…

  • 8th Dec 2017

    सुप्रभात

    रंग पैराहन का, खुशबू ज़ुल्फ लहराने का नाम, मौसम-ए-गुल है तुम्हारे बाम पर आने का नाम। आपका दिन शुभ हो।

  • 7th Dec 2017

    113. तानसेन

    आज तानसेन से जुड़ा एक प्रसंग याद आ रहा है, जो कहीं सुना या पढ़ा था। अकबर के दरबार में तानसेन गाते थे और सभी मंत्रमुग्ध होकर सुनते थे। अकबर उनकी भरपूर तारीफ करते, कहते तानसेन आप कितना सुंदर गाते हो, एक दूसरी ही दुनिया में ले जाते हो। आपके जैसा कोई नहीं है। एक…

  • 6th Dec 2017

    112. बच्चा स्कूल जा रहा है!

    आज बिना किसी भूमिका के, निदा फाज़ली साहब की एक नज़्म शेयर कर रहा हूँ, यह नज़्म खुद इतना कहती है कि मैं उसके आगे क्या कह पाऊंगा! बच्चा जब स्कूल जाता है, शिक्षा प्राप्त करता है, अपने लिए और अपने समय के लिए, देश के लिए, दुनिया के लिए सपने बुनता है, उससे ही…

  • 5th Dec 2017

    111. परदेसियों को है एक दिन जाना!

    विख्यात फिल्म अभिनेता शशि कपूर नहीं रहे। वैसे तो वे लंबे समय से बीमार थे, काफी दिन पहले जब उनको दादा साहब फाल्के पुरस्कार प्रदान किया गया था, तब वह भी उनके अपने स्थान पर दिया गया था और वे उस समय भी व्हील चेयर पर आए थे। कुछ यह कपूर परिवार में लगभग सभी…

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