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A short trip within Goa
I have been living in Goa for last more than a year. I never visited Goa before shifting here and after coming here I have rarely moved out for sight seeing. Recently we had some guests and they visited various places in Goa for 3 days. I also joined them on the last day of…
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We, the shunting trains, for #MyFriendAlexa!
(above-London from top) For participating in #MyFriendAlexa, today I am sharing the English translation of one of my Hindi poems. I have already submitted english translation of a Ghazal sung by Ghulam Ali Ji. So today, my entry in the form of English translation of my poem, is based on the life in the…
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We must raise our voice, when required!
This post I am writing keeping in mind the Indian scenario, but I feel that it holds good for any country, any society and any environment. Our country India had witnessed a phase in recent past, when one after another scams were coming to light. It does not happen suddenly. The ruling class feels…
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258. Keep Drinking O Jovial Guy!
I normally write my posts in Hindi. But now since I am participating in a month long campaign ‘My friend Alexa’ organized by Blogchatter, during September I would submit some of my posts in English. Today I submit a layman’s English translation of a Ghazal written by Akhtar Sheerani Ji and sung by Ghulam Ali…
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119. धरती के कागज़ पर मेरी तस्वीर अधूरी रहनी थी!
आज फिर से प्रस्तुत है, एक और पुरानी ब्लॉग पोस्ट- हिंदी के एक अत्यंत श्रेष्ठ गीतकार थे श्री भारत भूषण जी, मेरठ के रहने वाले थे और काव्य मंचों पर मधुरता बिखेरते थे। मैं यह नहीं कह सकता कि वे सबसे लोकप्रिय थे, परंतु जो लोग कवि-सम्मेलनों में कविता, गीतों के आस्वादन के लिए जाते…
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118. ये धुआं सा कहाँ से उठता है!
आज फिर से प्रस्तुत है, एक और पुरानी ब्लॉग पोस्ट- एक किस्सा याद आ रहा है, एक सज्जन थे, नशे के शौकीन थे, रात में सोते समय भी सिगरेट में नशा मिलाकर पीते थे, एक बार सुट्टे मारते-मारते सो गए, और बाद में अचानक उन्हें धुआं सा महसूस हुआ, कुछ देर तो सोचते रहे कि…
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257. सुंदर सपना बीत चला!
(Image Courtesy- Twitter) स्व. राज कपूर जी द्वारा अभिनीत फिल्म- सपनों का सौदागर का एक गीत है- सपनों का सौदागर आया, ले लो ये सपने ले लो, तुमसे किस्मत खेल चुकी, तुम किस्मत से खेलो। इसी गीत में आगे एक पंक्ति है- वो तय कर लेगा मंज़िल, जो एक सपना अपनाए! और हाँ, राज…
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116. फिरता है चांदनी में कोई सच डरा-डरा!
आज फिर से प्रस्तुत है, एक और पुरानी ब्लॉग पोस्ट- दुष्यंत कुमार जी का एक शेर है- खरगोश बनके दौड़ रहे हैं तमाम ख्वाब, फिरता है चांदनी में कोई सच डरा-डरा। यह शेर वैसे तो आपात्काल में लिखी गई उनकी गज़लों के संग्रह ‘साये में धूप’ से लिया गया है, जिस माहौल में यह शेर…
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115. सुविधा की होड़ और विद्रोही मुद्राएं!
आज फिर से प्रस्तुत है, एक और पुरानी ब्लॉग पोस्ट- आज अपने ही एक गीत के बहाने बात कर लेता हूँ। शायद मैंने यह कविता पहले भी शेयर की हो, जब मैंने शुरू के अपने ब्लॉग, अपने जीवन के विभिन्न चरणों के बहाने, अपने बचपन से प्रारंभ करके लिखे थे, उस समय तो यहाँ ब्लॉग…
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256. WOW: 30 चीजें जिनसे मुझे वास्तव में खुशी मिलती है!
बहुत अच्छा लगने वाला लेकिन काफी कठिन सवाल है! क्या है जो आपको बहुत अच्छा लगता है। ऐसा मुझसे सामान्यतः पूछा जाए, तो शायद मैं दो-तीन चीजें गिनाकर रुक जाऊंगा। लेकिन ऐसी 30 चीजें! बहुत मुश्किल है उस आंकड़े तक पहुंचना जी। चलिए आपके साथ मिलकर वहाँ तक पहुंचने की कोशिश करते हैं। कुछ बातें…