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SamaySakshi

A sky full of cotton beads like clouds

    • 81. सरेआम अमानवीयता
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  • 25th Oct 2018

    128. पेड़!

    आज फिर से प्रस्तुत है एक पुरानी ब्लॉग पोस्ट- किसी ज़माने में कविताएं लिखने का बहुत चाव था। उस समय जो कविताएं किसी हद तक ‘परफेक्ट’ लगती थीं उनको मित्रों के बीच, गोष्ठियों में पढ़ देता था। बहुत सी पांडुलिपियां ऐसी होती थीं जिनको लेकर तसल्ली नहीं होती थी। ऐसी ही कुछ कागज़ पर सुरक्षित…

  • 24th Oct 2018

    तेरी याद दिल से भुलाने चला हूँ!

    आज अपने प्रिय गायक मुकेश जी के गाये एक गीत का पहले अंग्रेजी रूपांतर प्रस्तुत करूंगा और बाद में मूल गीत प्रस्तुत करूंगा। यह गीत शैलेंद्र जी ने लिखा था और इसका संगीत दिया था – शंकर-जयकिशन कि विख्यात जोड़ी ने, फिल्म है- 1962 में रिलीज़ हुई- हरियाली और रास्ता। फिल्म के नायक थे- मनोज…

  • 23rd Oct 2018

    फ्लोरेंस और पीसा के बीच मार्ग पर लिखे गए कुछ छंद

    आज फिर से अंग्रेजी के प्रसिद्ध कवि लॉर्ड बॉयरन की एक और कविता का भावानुवाद और उसके बाद मूल कविता प्रस्तुत कर रहा हूँ। पहले प्रस्तुत है मेरे द्वारा किया गया कविता का भावानुवाद- फ्लोरेंस और पीसा के बीच मार्ग पर लिखे गए कुछ छंद अरे,मुझसे किसी ऐसे नाम के बारे में बात न करो,जो…

  • 22nd Oct 2018

    126. कहती टूटी दीवट, सुन री उखड़ी देहरी!

    आज फिर से प्रस्तुत है एक पुरानी ब्लॉग पोस्ट- आज एक खबर कहीं पढ़ी कि उत्तराखंड के किसी गांव में केवल बूढ़े लोग रह गए हैं, विशेष रूप से महिलाएं, जवान लोग रोज़गार के लिए शहरों को पलायन कर गए हैं। वैसे यह खबर नहीं, प्रक्रिया है, जो न जाने कब से चल रही है,…

  • 21st Oct 2018

    WOW: What If, It is festival season always?

    Now are the days of festivals, I think starting with Ganesh Puja- festivals, celebrations continue till the year-end, while the year-end, welcoming of the New Year is a big celebration in itself. There are old stories associated with each festival, some great soul, God himself, worshipping celebrating the old auspicious events, like the return of…

  • 20th Oct 2018

    Education and Literacy

    Again I am getting a chance to discuss about the Indian Education system, find faults with it and try to suggest some steps to improve it, while I do not consider myself educated enough to do all that! But the fact remains that we the Indians, might not be able to accomplish something, do some…

  • 19th Oct 2018

    संगीत के लिए कुछ छंद

    आज अंग्रेजी के प्रसिद्ध कवि लॉर्ड बॉयरन की एक और कविता का भावानुवाद और उसके बाद मूल कविता प्रस्तुत कर रहा हूँ। पहले प्रस्तुत है मेरे द्वारा किया गया कविता का भावानुवाद- संगीत के लिए कुछ छंद ऐसी कोई नहीं होगी सौंदर्य-पुत्री, जिसका जादू तुम्हारी तरह मुग्ध करता हो, और तुम्हारा मधुर स्वर है मेरे…

  • 18th Oct 2018

    एक आत्मा मेरे सामने आई!

    <strong>एक आत्मा मेरे सामने आई!</strong> आज अंग्रेजी के प्रसिद्ध कवि लॉर्ड बॉयरन की एक और कविता का भावानुवाद और उसके बाद मूल कविता प्रस्तुत कर रहा हूँ। पहले प्रस्तुत है मेरे द्वारा किया गया कविता का भावानुवाद- एक आत्मा मेरे सामने आई! एक अमर आत्मा मेरे सामने आई: और मैंने गौर से देखा, अमरत्व का…

  • 17th Oct 2018

    अकेलापन!

    आज अंग्रेजी के प्रसिद्ध कवि लॉर्ड बॉयरन की एक कविता का भावानुवाद और उसके बाद मूल कविता प्रस्तुत कर रहा हूँ। पहले प्रस्तुत है मेरे द्वारा किया गया कविता का भावानुवाद- अकेलापन चट्टानों पर बैठना, बाढ़ और गिरे हुए पेड़ों पर चिंतन करना, वन के छायादार फैलाव का धीरे-धीरे अवगाहन करना, जहाँ ऐसी वस्तुओं का…

  • 16th Oct 2018

    ये ‘मी टू’ क्या है जी!

    आजकल एक विषय विशेष रूप से चर्चा में है। ऐसा बहुत सी बार होता है, विदेशों में, पश्चिम में कोई विषय शुरू होता है और फिर एक फैशन के तहत वो भारत में फैल जाता है। जैसे टेलीविज़न के बहुत से ‘शो’, वो ‘गेम शो’ हों या ‘टेलेंट शो’ हों, वे पश्चिम में शुरू होते…

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