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A sky full of cotton beads like clouds

    • 81. सरेआम अमानवीयता
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  • 6th Jan 2020

    अंत- रवींद्रनाथ ठाकुर

    आज, मैं फिर से भारत के नोबल पुरस्कार विजेता कवि गुरुदेव रवींद्र नाथ ठाकुर की एक और कविता का अनुवाद प्रस्तुत कर रहा हूँ। यह उनकी अंग्रेजी भाषा में प्रकाशित जिस कविता का भावानुवाद है, उसे अनुवाद के बाद प्रस्तुत किया गया है। मैं अनुवाद के लिए अंग्रेजी में मूल कविताएं सामान्यतः ऑनलाइन उपलब्ध काव्य…

  • 5th Jan 2020

    धूल हूँ मैं तू पवन बसंती!

    आज काफी लंबे अंतराल के बाद मैं अपने प्रिय गायक मुकेश जी के गाए एक गीत के बोल शेयर कर रहा हूँ। इस गीत को जीतेंद्र जी पर फिल्माया गया है। जीतेंद्र जी के लिए भी मुकेश जी ने बहुत से हिट गीत गाये हैं। 1969 में रिलीज़ हुई फिल्म- ‘धरती कहे पुकार के’ के…

  • 4th Jan 2020

    Country to live in!

    Again I am talking on a topic for discussion. The topic for discussion is ‘which country one would choose to live’. Frankly speaking if a person has to choose from various options, one should be well aware about the various options available!     I remember a comment made by Osho Rajneesh on a couplet…

  • 3rd Jan 2020

    सोशल मीडिया- डेड प्रोफाइल्स!

    अभी मैंने नए वर्ष के अवसर पर एक समस्या का उल्लेख किया था, मुझे लगता है कि इस विषय पर अलग से आलेख लिखकर सोशल मीडिया के प्लेटफॉर्म्स को चलाने वाले प्रमुख दलों का ध्यान इस ओर दिलाए जाने की आवश्यकता है।     हाँ तो जिस समस्या की ओर मैंने संकेत किया था वह…

  • 2nd Jan 2020

    प्रारंभ- रवींद्रनाथ ठाकुर

    आज, मैं फिर से भारत के नोबल पुरस्कार विजेता कवि गुरुदेव रवींद्र नाथ ठाकुर की एक और कविता का अनुवाद प्रस्तुत कर रहा हूँ। यह उनकी अंग्रेजी भाषा में प्रकाशित जिस कविता का भावानुवाद है, उसे अनुवाद के बाद प्रस्तुत किया गया है। मैं अनुवाद के लिए अंग्रेजी में मूल कविताएं सामान्यतः ऑनलाइन उपलब्ध काव्य…

  • 1st Jan 2020

    ट्वेंटी-ट्वेंटी (2020) की शुरूआत!

    लो जी नया साल शुरू हो गया। ऐसे मौकों के लिए लोग अपनी पोस्ट तैयार रखते हैं, जिससे घड़ी का कांटा सही जगह पहुंचते ही तुरंत ‘चेप’ दें। लेकिन मैं थोड़ा सुस्त बंदा हूँ।     वैसे इस साल का शीर्षक भी जोरदार है ‘ट्वेंटी-ट्वेंटी’, जैसे 20-20 का क्रिकेट मैच रोमांचक और उत्साह से भरा…

  • 31st Dec 2019

    श्रीकृष्ण शर्मा ‘अशेष’ की रचनायें-21 / भाषा की डुगडुगी बजाते हैं!

    मेरी उपलब्ध रचनाएं यहाँ शेयर करने का आज इक्कीसवां और फिलहाल अंतिम दिन है, इस प्रकार जहाँ इन सबको, जितनी उपलब्ध थीं, एक साथ शेयर करने की कोशिश की है, जिससे यदि कभी कोई संकलनकर्ता इनको ऑनलाइन संकलन में शामिल करना चाहे तो कर ले। जैसा मैंने पहले भी बताया है, हमेशा ‘श्रीकृष्ण शर्मा’ नाम…

  • 30th Dec 2019

    श्रीकृष्ण शर्मा ‘अशेष’ की रचनायें-20 / दूर बहुत दूर!

    मेरी उपलब्ध रचनाएं यहाँ शेयर करने का आज बीसवां दिन है, इस प्रकार जहाँ इन सबको, जितनी उपलब्ध हैं, एक साथ शेयर कर लूंगा जिससे यदि कभी कोई संकलनकर्ता इनको ऑनलाइन संकलन में शामिल करना चाहे तो कर ले। इसके लिए मैं अपनी ब्लॉग पोस्ट्स में जिस क्रम में कविताएं पहले शेयर की हैं, उसी…

  • 29th Dec 2019

    श्रीकृष्ण शर्मा ‘अशेष’ की रचनायें-19 / लगता है लोकतंत्र इसी तरह आता है!

    मेरी उपलब्ध रचनाएं यहाँ शेयर करने का आज उन्नीसवां दिन है, इस प्रकार जहाँ इन सबको, जितनी उपलब्ध हैं, एक साथ शेयर कर लूंगा जिससे यदि कभी कोई संकलनकर्ता इनको ऑनलाइन संकलन में शामिल करना चाहे तो कर ले। इसके लिए मैं अपनी ब्लॉग पोस्ट्स में जिस क्रम में कविताएं पहले शेयर की हैं, उसी…

  • 27th Dec 2019

    श्रीकृष्ण शर्मा ‘अशेष’ की रचनायें-18/ गीत उगने दो!

    मेरी उपलब्ध रचनाएं यहाँ शेयर करने का आज अठारहवां दिन है, इस प्रकार जहाँ इन सबको, जितनी उपलब्ध हैं, एक साथ शेयर कर लूंगा जिससे यदि कभी कोई संकलनकर्ता इनको ऑनलाइन संकलन में शामिल करना चाहे तो कर ले। इसके लिए मैं अपनी ब्लॉग पोस्ट्स में जिस क्रम में कविताएं पहले शेयर की हैं, उसी…

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