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A sky full of cotton beads like clouds

    • 81. सरेआम अमानवीयता
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  • 29th Oct 2021

    सीढ़ी फिसल न जाए कहीं!

    कभी मचान पे चढ़ने की आरज़ू उभरीकभी ये डर कि ये सीढ़ी फिसल न जाए कहीं| दुष्यंत कुमार

  • 29th Oct 2021

    उम्र नशे में निकल न जाए कहीं!

    तमाम रात तेरे मैकदे में मय पी हैतमाम उम्र नशे में निकल न जाए कहीं| दुष्यंत कुमार

  • 29th Oct 2021

    ये गर्म राख!

    चले हवा तो किवाड़ों को बंद कर लेनाये गर्म राख़ शरारों में ढल न जाए कहीं| दुष्यंत कुमार

  • 29th Oct 2021

    पिघल न जाए कहीं !

    यों मुझको ख़ुद पे बहुत ऐतबार है लेकिनये बर्फ आंच के आगे पिघल न जाए कहीं दुष्यंत कुमार

  • 29th Oct 2021

    बंदिश निगल न जाए कहीं!

    वो देखते है तो लगता है नींव हिलती हैमेरे बयान को बंदिश निगल न जाए कहीं| दुष्यंत कुमार

  • 29th Oct 2021

    नज़ारा बदल न जाए कहीं!

    नजर-नवाज़ नजारा बदल न जाए कहींजरा-सी बात है मुँह से निकल न जाए कहीं| दुषयांत कुमार

  • 29th Oct 2021

    हम तुम ना जुदा होंगे!

    मोहम्मद रफी साहब का नाम, भारतीय सिने संगीत की दुनिया में किसी परिचय का मोहताज नहीं है| जिस तरह नायकों की दुनिया में राज कपूर, दिलीप कुमार और देव आनंद की तिकड़ी प्रसिद्ध थे, उसी प्रकार पुरुष गायकों की दुनिया में रफी, मुकेश और किशोर कुमार ऐसे नाम हैं जिनको भुलाया जाना मुश्किल है| आज…

  • 28th Oct 2021

    वो भी हर किसी की तरह!

    कभी न सोचा था हमने क़तील उसके लिए,करेगा हम पे सितम वो भी हर किसी की तरह। क़तील शिफाई

  • 28th Oct 2021

    वो भी न बन सका अपना!

    सितम तो ये है कि वो भी न बन सका अपना,क़ुबूल हमने किया जिसका गम खुशी की तरह। क़तील शिफाई

  • 28th Oct 2021

    प्यास !

    बढ़ा के प्यास मेरी, उसने हाथ छोड़ दिया,वो कर रहा था मुरव्वत भी दिल्लगी की तरह। क़तील शिफाई

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