Skip to content

SamaySakshi

A sky full of cotton beads like clouds

    • 81. सरेआम अमानवीयता
    • Activity
    • Members
    • Sample Page
    • Sample Page
    • Sample Page
    • About
    • Contact
  • 23rd Dec 2017

    124. जीते जी तरना चाहे तो, पी ले गंगाजल के बदले!

    आस्था के बारे में एक प्रसंग याद आ रहा है, जो कहीं सुना था। ये माना जाता है कि यदि आप सच्चे मन से किसी बात को मानते हैं, इस प्रसंग में यदि आप ईश्वर को पूरे मन से मानते हैं, तो वह आपको अवश्य मिल जाएगा। इस बीच कवि सोम ठाकुर जी के गीत…

  • 22nd Dec 2017

    123. सुनते थे वो आएंगे, सुनते थे सहर होगी!

    एक बार और दिल की बात कर लेते हैं, ऐसे ही कुछ बातें और आ रही हैं दिमाग में, आप इसे दिल पर मत लेना। कितनी तरह के दिल लिए घूमते हैं दुनिया में लोग, एक गीत में किसी ने बताया था- ‘कोई सोने के दिल वाला, कोई चांदी के दिल वाला, शीशे का है…

  • 21st Dec 2017

    122. फिर वही दिल लाया हूँ!

    आज फिर दिल की बात होनी है, वैसे तो मैं समझता हूँ कि हर दिन इसी विषय पर बात की जा सकती है। एक गीत का मुखड़ा याद आ रहा है, जिस अंदाज़ में इसे रफी साहब ने गाया है, उससे यही लगता है कि यह शम्मी कपूर जी पर फिल्माया गया होगा, शायद फिल्म…

  • 20th Dec 2017

    121. दिल ही तो है !

    अगर यह पूछा जाए कि रसोई में कौन सी वस्तु, कौन सा पदार्थ सबसे महत्वपूर्ण है तो पाक कला में निपुण कोई व्यक्ति, अब महिला कहने से बच रहा हूँ, क्योंकि बड़े‌-बड़े ‘शेफ’ आज की तारीख में पुरुष हैं, हाँ कोई भी ऐसा व्यक्ति बता देगा कि यह वस्तु सबसे ज्यादा उपयोग में आती है…

  • 19th Dec 2017

    120. शाम और यादें!

    कविताओं और फिल्मी गीतों में शाम को अक्सर यादों से जोड़ा जाता है। यह खयाल आता है कि ऐसा क्या है, जिसके कारण शाम यादों से जुड़ जाती है! यहाँ दो गीत याद आते हैं जो शाम और यादों का संबंध दर्शाते हैं। एक गीत रफी साहब का गाया हुआ, जिसकी पंक्तियां हैं- हुई शाम…

  • 17th Dec 2017

    119. धरती के कागज़ पर मेरी तस्वीर अधूरी रहनी थी!

    हिंदी के एक अत्यंत श्रेष्ठ गीतकार थे श्री भारत भूषण जी, मेरठ के रहने वाले थे और काव्य मंचों पर मधुरता बिखेरते थे। मैं यह नहीं कह सकता कि वे सबसे लोकप्रिय थे, परंतु जो लोग कवि-सम्मेलनों में कविता, गीतों के आस्वादन के लिए जाते थे, उनको भारत भूषण जी के गीतों से बहुत सुकून…

  • 15th Dec 2017

    118. ये धुआं सा कहाँ से उठता है!

    एक किस्सा याद आ रहा है, एक सज्जन थे, नशे के शौकीन थे, रात में सोते समय भी सिगरेट में नशा मिलाकर पीते थे, एक बार सुट्टे मारते-मारते सो गए, और बाद में अचानक उन्हें धुआं सा महसूस हुआ, कुछ देर तो सोचते रहे कि कहाँ से आ रहा है, बाद में पता चला कि…

  • 14th Dec 2017

    117. पतंगबाज़ी मुबारक!

    देश में कुछ अवसरों पर पतंगबाज़ी का माहौल बनता है, जिनमें से एक शायद मकर संक्रांति का अवसर है। आज से लेकर अगले दो-तीन दिनों तक भी देश में पतंगबाज़ी का माहौल रहने वाला है। यह पतंगबाज़ी होगी विभिन्न टीवी चैनलों पर जहाँ अलग-अलग एग्ज़िट पोल विशेषज्ञ अपने-अपने चुनाव परिणाम प्रस्तुत करेंगे और असली चुनाव…

  • 12th Dec 2017

    116. फिरता है चांदनी में कोई सच डरा-डरा!

    दुष्यंत कुमार जी का एक शेर है- खरगोश बनके दौड़ रहे हैं तमाम ख्वाब, फिरता है चांदनी में कोई सच डरा-डरा। यह शेर वैसे तो आपात्काल में लिखी गई उनकी गज़लों के संग्रह ‘साये में धूप’ से लिया गया है, जिस माहौल में यह शेर और भी अधिक गहन अर्थ ग्रहण करता है, परंतु यह…

  • 11th Dec 2017

    115. सुविधा की होड़ और विद्रोही मुद्राएं!

    आज अपने ही एक गीत के बहाने बात कर लेता हूँ। शायद मैंने यह कविता पहले भी शेयर की हो, जब मैंने शुरू के अपने ब्लॉग, अपने जीवन के विभिन्न चरणों के बहाने, अपने बचपन से प्रारंभ करके लिखे थे, उस समय तो यहाँ ब्लॉग की साइट पर मैं खुद ही लिखने वाला और खुद…

←Previous Page
1 … 1,360 1,361 1,362 1,363 1,364 … 1,374
Next Page→

Blog at WordPress.com.

Privacy & Cookies: This site uses cookies. By continuing to use this website, you agree to their use.
To find out more, including how to control cookies, see here: Cookie Policy
  • Subscribe Subscribed
    • SamaySakshi
    • Join 1,143 other subscribers.
    • Already have a WordPress.com account? Log in now.
    • SamaySakshi
    • Subscribe Subscribed
    • Sign up
    • Log in
    • Report this content
    • View site in Reader
    • Manage subscriptions
    • Collapse this bar