Skip to content

SamaySakshi

A sky full of cotton beads like clouds

    • 81. सरेआम अमानवीयता
    • Activity
    • Members
    • Sample Page
    • Sample Page
    • Sample Page
    • About
    • Contact
  • 25th Jan 2018

    7. बाबूराम स्कूल

    (पुराने ब्लॉग्स को दोहराने के क्रम में भी मैं अनुक्रम का पालन नहीं कर पा रहा हूँ, आज प्रस्तुत है स्कूल के कुछ अनुभव!) अब स्कूल के बारे में बात कर लें। कक्षा 1 से 5 तक गौशाला वाले सनातन धर्म स्कूल के बारे में तो बताने को कुछ नहीं है। बाबूराम स्कूल के बारे…

  • 24th Jan 2018

    10. रोज़गार दफ्तर की फाइलें भरें

    शुरु के ब्लॉग्स को दोहराने के क्रम में प्रस्तुत है ये मेरा दसवां ब्लॉग। मैं 4-5 दिन तक बाहर रहा, मेरे छोटे बेटे के विवाह के सिलसिले में, सोचा था वहाँ पर रहते हुए भी, पुराने ब्लॉग्स तो दोहरा ही सकता हूँ, लेकिन यह संभव नहीं हो पाया, इस बीच में कोई ब्लॉग पढ़ भी…

  • 20th Jan 2018

    9. झूमती चली हवा

    अपने शुरु के ब्लॉग्स में से एक और आज दोहरा रहा हूँ, वैसे यह नौवां ब्लॉग था, और शायद शाहदरा में मेरी प्रवास अवधि के संबंध में अंतिम पड़ाव जैसा था। लगातार सीधी राह पर चलते जाने से भी काफी थकान हो जाती है, अतः थोड़ा इधर-उधर टहल लेते हैं। मैं यह भी बता दूं…

  • 19th Jan 2018

    4. इब्तदा कुछ इस तरह

    अपने शुरु के ब्लॉग्स में से एक को आज दोहरा रहा हूँ, वैसे यह चौथा ब्लॉग था, लेकिन इससे मैंने क्रमशः अपनी कहानी सुनाना शुरू किया था। किसी ने फिर न सुना, दर्द के फसाने को मेरे न होने से राहत हुई ज़माने को।  खैर दर्द का फसाना सुनाने का मेरा कोई इरादा नहीं है।…

  • 18th Jan 2018

    149. अंतराल- दोहराव

    एक वर्ष से कुछ कम समय हुआ है, जब अचानक ब्लॉग लिखने की सनक सवार हुई थी। मैंने शुरुआत की थी, अपने जीवन के प्रारंभ से, कुछ महत्वपूर्ण घटनाओं, व्यक्तियों आदि का, उनके माध्यम से मेरे जीवन पर पड़े प्रभाव आदि का ज़िक्र करते हुए। शायद 50-60 ब्लॉग, मैंने अपने जीवन के घटनाक्रम को फॉलो…

  • 17th Jan 2018

    148. कच्ची दीवार हूँ, ठोकर न लगाना मुझको

    इंसान परिस्थितियों के अनुसार क्या-क्या नहीं बनता और अपने आपको किस-किस रूप में महसूस नहीं करता। कभी-कभी  जीवन में ऐसा भी लगता है कि अब बहुत सहन कर लिया, एक झटका और लगा तो टूटकर बिखर जाएंगे। अरेे कुछ नहीं  ज़नाब, बस असरार अंसारी जी की एक गज़ल याद आ रही थी, जिसको गुलाम अली…

  • 16th Jan 2018

    147. खुशबू जैसे लोग

    अभी कल ही अपने एक पुराने कवि-मित्र का ज़िक्र किया था, मुद्दत हो गई उनसे मिले लेकिन आज भी याद आती है। हाँ कुछ लोग ऐसे भी होते हैं लोग जो लंबे समय बाद भी यादों में खटकते रहते हैं, हालांकि उनको भुला देना ही बेहतर होता है,  मैं यह कहना चाहूंगा कि मेरे जीवन…

  • 15th Jan 2018

    146. इस सूने उदास मौसम में, कुछ तो यार करें

    आज फिर पुराने दिनों में झांकने का मन हो रहा है, एक मित्र की याद आ रही है। बात है 1980 से 1983 के बीच की, जब मैं आकाशवाणी, जयपुर में अनुवादक के पद पर कार्यरत था और वहाँ बने कवि मित्रों में से एक थे- श्री कृष्ण कल्पित, वे उस समय जयपुर विश्वविद्यालय  से…

  • 14th Jan 2018

    145. तेरा दर्द ना जाने कोय

    जीवन में अब तक, बहुत से शहरों और क्षेत्रों में रहने का अवसर मिला, हर स्थान की अपनी विशेषता और कमियां हैं। लेकिन कुछ बातें हैं जो भारत में,  हर जगह समान रूप से होती हैं। जैसे रात में आप उठें और बाथ-रूम जाएं तो आपको कुत्तों के रोने का शोर सुनाई देगा। यह शोर…

  • 13th Jan 2018

    144. बसंती पागल पवन – राज कपूर

    आज एक बार फिर मेरे उस्ताद राज कपूर जी की याद आ रही है, फिल्म- ‘जिस देश में गंगा बहती है’ और उसके एक गीत के बहाने। जबलपुर में जब भेड़ाघाट जाते हैं, तब वहाँ नाव वाले घुमाते हुए बताते हैं, कि यहाँ ‘मेरा नाम राजू’ गाने की शूटिंग हुई थी और यहाँ पद्मिनी ने…

←Previous Page
1 … 1,357 1,358 1,359 1,360 1,361 … 1,374
Next Page→

Blog at WordPress.com.

Privacy & Cookies: This site uses cookies. By continuing to use this website, you agree to their use.
To find out more, including how to control cookies, see here: Cookie Policy
  • Subscribe Subscribed
    • SamaySakshi
    • Join 1,143 other subscribers.
    • Already have a WordPress.com account? Log in now.
    • SamaySakshi
    • Subscribe Subscribed
    • Sign up
    • Log in
    • Report this content
    • View site in Reader
    • Manage subscriptions
    • Collapse this bar