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SamaySakshi

A sky full of cotton beads like clouds

    • 81. सरेआम अमानवीयता
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  • 4th Feb 2018

    13. मंज़िल न दे, चराग न दे, हौसला तो दे

    पुरानी कहानी के पन्ने इतने रोचक हैं, कि उनको दोहराते चले जाने का मन करता है। लीजिए एक पन्ना और खोल रहा हूँ। एक नाइंसाफी तो लंबे समय से चलती चली आई है कि इतिहास को राजाओं के शासन काल से बांट दिया गया, बल्कि इतिहास का मतलब सिर्फ इतना हो गया कि किस राजा…

  • 3rd Feb 2018

    12. सफर दरवेश है ऐ ज़िंदगी….

    जीवन गाथा के शुरुआती पन्नों में से आज एक पन्ना और दोहरा रहा हूँ। दिल्ली में रहते हुए मैंने पीताम्बर बुक डिपो और दिल्ली प्रेस में दो प्राइवेट नौकरी की थीं और उसके बाद 6 वर्ष  तक उद्योग मंत्रालय में कार्य किया, जिसमें से मैं 3 वर्ष तक संसदीय राजभाषा समिति में डेपुटेशन पर भी…

  • 2nd Feb 2018

    152. ओरांगउटांग

    आज मुक्तिबोध जी की एक श्रेष्ठ रचना याद आ रही है, जिसमें विचारधाराओं के युद्ध को लेकर बड़ा सुंदर वर्णन किया गया है, वह कविता या साहित्य के क्षेत्र में हो, राजनीति में हो या किसी अन्य क्षेत्र में हो। कई बार बाद में ऐसा लगता है कि विचारधारा कहीं पीछे रह गई है और…

  • 1st Feb 2018

    मोहल्ला मेरा

    आज, मेरे शुरू के ब्लॉग पोस्ट्स में से एक पोस्ट और, जिसमें मैंने उस मोहल्ले की थोड़ी झलक दिखाई है, जिसमें मेरा बचपन बीता था। अब थोड़ा समय उस मोहल्ले को भी दे दें, जो लगभग 25 वर्ष तक मेरा ठिकाना था। जैसा मैंने अपने पिछले ब्लॉग में लिखा था, दरियागंज छोड़कर हम भोलानाथ नगर,…

  • 31st Jan 2018

    151. नाज़ था जिस पे, मेरे सीने में वो दिल ही नहीं!

      आज मुकेश जी का गाया एक बहुत प्यारा गीत याद आ रहा है। यह गीत लिखा है- जावेद अनवर जी और असद भोपाली जी ने, संगीतकार हैं- उषा खन्ना जी और गायक हैं मेरे प्रिय मुकेश जी। ऐसे गीत कुछ मौकों पर बहुत सहारा देते हैं, कुछ अंदर की  भाप निकालने के लिए, जब…

  • 30th Jan 2018

    3. चल अकेला

    आज फिर बेधड़क, अपना शुरू का एक ब्लॉग शेयर कर रहा हूँ। हज़ारों मील लंबे रास्ते तुझको बुलाते, यहाँ दुखड़े सहने के वास्ते तुझको बुलाते है कौन सा वो इंसान यहाँ पर जिसने दुख ना झेला। चल अकेला, चल अकेला, चल अकेला । मुकेश जी के गाये इस गीत ने जीवन में बहुत बार हिम्मत…

  • 29th Jan 2018

    150. तूने जिस फूल को पाला वो पराया होगा।

    कुछ दिन से नई पोस्ट नहीं लिख रहा था, बेटे की शादी थी, सोचा कि इस बीच पुरानी पोस्ट ही शेयर कर लेता हूँ, जो जीवन के विभिन्न पड़ावों से जुड़ी हैं और मेरे दिल के बहुत क़रीब हैं। आगे भी इनको शेयर करूंगा, फिलहाल मेरा 150 वां ब्लॉग पोस्ट, जो कुछ दिन से स्थगित…

  • 28th Jan 2018

    11. हम शंटिंग ट्रेन हो गए

    (पुराने ब्लॉग्स को दोहराने के क्रम में आज दिल्ली में प्रारंभिक नौकरी, दैनिक रेल-यात्रा आदि के कुछ अनुभव! ) पीताम्बर बुक डिपो में कुल मिलाकर मैं एक साल तक रहा, उसके बाद मैंने फैसला कर लिया कि अब यहाँ अधिक समय तक नहीं रहूंगा। अब तक इतना आत्मविश्वास आ गया था कि मैं इससे बेहतर काम…

  • 27th Jan 2018

    8. कालेज के दिन

    (पुराने ब्लॉग्स को दोहराने के क्रम में आज प्रस्तुत है कालेज जीवन के कुछ अनुभव, यह आलेख थोड़ा लंबा और गहन है! ) बाबूराम स्कूल में 6 साल रहा और अच्छा खासा जुड़ाव रहा स्कूल से, इसलिए स्कूल के बारे में, वहाँ के शिक्षकों के बारे में भी मैंने कुछ बात की। यहाँ स्पष्ट कह…

  • 26th Jan 2018

    अमर रहे गणतंत्र हमारा

    आज हमारे महान गणतंत्र की वर्षगांठ के अवसर मैं अपने सभी देशवासियों को परम श्रद्धेय अटल बिहारी वाजपेयी जी की इन गीत पंक्तियों के साथ शुभकामनाएं देता हूँ तेरा गौरव अमर रहे मां  हम दिन चार रहें न रहें। पुनः अनंत शुभकामनाएं।

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